नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। बजट 2022-23 से तमाम उद्योगों को बड़ी उम्मीदें हैं। बीते कुछ समय में कोरोना वायरस संक्रमण के कारण जो स्थिति पैदा हुई है और इस वायरस ने उद्योगों पर जो असर डाला है, उससे उबरने के लिए सभी उद्योग केंद्र सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले बजट 2022-23 की ओर देख रहे हैं। कृषि रसायन उद्योग को भी इस बजट से बड़ी उम्मीदें है। उद्योग के लिए पीएलआई योजना की जरूरत और सुगम ट्रांसपोर्ट व्यवस्था की मांग हो रही है। इसके साथ ही, कृषि रसायनों पर लगने वाली मौजूदा जीएसटी को भी घटाए जाने की मांग है।

बेस्ट एग्रोलाइफ लिमिटेड के एमडी विमल अलावधी ने कहा, “भारतीय कृषि रसायन उद्योग को एक अच्छी पीएलआई योजना की आवश्यकता है, इसके साथ ही देश में सुगम ट्रांसपोर्ट के साथ मध्यस्थों को कम करने की जरुरत है। इसे लागू करना इस उद्योग के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। हम यह भी उम्मीद करते हैं कि सरकार किसानों की आय को दोगुना करने के उद्देश्य को पूरा करने के लिए कृषि रसायनों पर जीएसटी को तर्कसंगत बनाने के लिए जीएसटी को 18% से घटाकर 6% करेगी।”

विमल अलावधी ने कहा, “हम स्थानीय उत्पादकों को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए उत्पादों पर आयात शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव रखना चाहते हैं। भारतीय उत्पादों को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना और भारतीय कृषि बाजार में उछाल लाने के लिए निर्यात उन्मुख घरेलू निर्माताओं को आकर्षक प्रोत्साहन प्रदान करना समय की जरुरत है। सरकार को भारतीय पिछड़े निर्माताओं के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करनी चाहिए जो विशेष रूप से आयात और चीन के प्रति एक दृढ़ प्रतियोगी बनने में मदद करेगा।”

बता दें कि रसायन, उर्वरक और कीटनाशकों ने “1960 और 1970 के दशक के दौरान हरित क्रांति” में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस क्षेत्र में अभी भी वही क्षमता है। भारत दुनिया में सबसे गतिशील जेनेरिक कीटनाशक निर्माताओं में से एक है, जहां 45 से अधिक तकनीकी ग्रेड कीटनाशकों का निर्माण किया जा रहा है। बहुराष्ट्री य कंपनियों सहित बड़े और मध्यम पैमाने के क्षेत्र में शामिल 32 कंपनियां तकनीकी कीटनाशकों के निर्माण में लगी हुई हैं।